खैनी (कहानी) II Khaini (Kahani, Story)
SejalRaja (सेजलराजा)
मेरा नाम रजनीश कांत है| मैं मुंबई में पत्रकार हूं| मुझे गाना लिखने और गाने का शौक है। साथ ही मैं कविता और कहानी भी लिखता हूं। तो, मुझे लगा कि मैं अपने शौक को आपके साथ साझा करूं। आपसे मुझे सहयोग की उम्मीद है।
सोमवार, 27 जनवरी 2025
खैनी (कहानी) II Khaini (Kahani, Story)
रविवार, 26 जनवरी 2025
जमालगोटा (कहानी) ll Jamalgota ( Story)
गर्मी का दिन था| रात के 11 बज गए थे| शादी करने के लिए बाराती लेकर लड़की के घर पहुंचे हुए लड़के वालों पर अब अपनी ही जिद भारी पड़ने लगी थी| भूख से सब का बुरा हाल था| बाराती झारखंड की राजधानी रांची से बिहार की मोक्ष भूमि गया के एक गांव में गई हुई थी|
गुरुवार, 22 अगस्त 2024
फिल्म कहानी लेखक हर दिन 2 सीन जरूर लिखें: फिल्म निर्माता Sooraj Barjatya का Film Writers को टिप्स II SWA II Screen Writers Association II
SWA यानी ScreenWritersAssociation ने 21-08-2024 को मुंबई के वेदा कुनबा थियेटर में जाने माने राइटर-डायरेक्टर- प्रोड्यूसर सूरज बड़जात्या से वार्तालाप की।
हम आपके हैं कौन, मैंने प्यार किया, विवाह, ऊंचाई जैसी सुपर डुपर हिट फिल्म देने वाले सुरज बाड़जात्या ने लेखकों को सफल फिल्मकार बनने के टिप्स दिए। आप भी अगर सफल फिल्म राइटर-डायरेक्टर या प्रोड्यूसर बनना चाहते हैं तो इस लिंक पर जाकर आप सूरज बड़जात्या की पूरी बातचीत देख सकते हैं-
(साभार- SWA)सूरज बड़जात्या का फिल्म राइटर्स के लिए टिप्स-
मंगलवार, 16 जुलाई 2024
Audio Kahani:Sejal Bin Sab Soon (Story)II SEJALRAJA II सेजलराजा II
गुरुवार, 20 जून 2024
SWA India: अपनी लिखी कहानी OTT पर दिखाना चाहते हैं, ScreenWriters, Producer, Directors बता रहे हैं तरीका
कामयाब होने के लिए ScreenWriters को Producer और Directors की सलाह
क्या आपने कोई कहानी लिखी है और चाहते हैं कि आपकी कहानी को ओटीटी प्लेटफॉर्म या सीरियल या सिनेमा के जरिये आम लोगों तक पहुंचे, लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि अपने इस सपने को कैसे पूरा करना है, तो Screenwriters Association (SWA India): https://swaindia.org/) द्वारा 19 जून 2024 को मुंबई के Veda Kunba Theatre में आयोजित पैनल डिस्कशन (https://www.youtube.com/watch?v=7TxQgRXxIuk) को जरूर पूरा देखें। मैं भी इस पैनल डिस्कशन में SWA के सदस्य के तौर पर शामिल हुआ था।
"क्या चल रहा है? - Trends and Challenges in Our Industry Today,नाम से आयोजित इस पैनल डिस्कशन को स्क्रीनराइटर-डायरेक्टर Satyanshu Singh ने Moderate किया। इस डिस्कशन में पैनलिस्ट के तौर पर प्रोड्यूसर Gaurav Verma, स्क्रीनराइटर Anu Singh Choudhary, स्क्रीनराइटर प्रोड्यूसर Biswapati Sarkar और प्रोड्यूसर Lohita Phooken ने अपने अपने विचार रखे।
स्क्रीनराइटर Anu Singh Choudhary ने बताया कि किसी भी स्क्रीनराइटर को कामयाब कहानी लिखने के लिए क्या क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्क्रीनराइटर को डायरेक्टर प्रोड्यूसर और ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय सबसे पहले अपनी कहानी पर काम करना चाहिए। हर दिन कम से कम तीन घंटे लिखने पर ध्यान देना चाहिए। चौधरी ने भी कहा कि स्क्रीनराइटर्स को पैसा के लिए केवल अपनी लेखनी के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके पास दूसरा इनकम स्रोत भी होना चाहिए।
चौधरी ने कहा कि स्क्रीनराइटर को केवल लिखना ही नहीं चाहिए, साथ ही अपनी लिखी कहानी को दूसरों को भी सुनाना चाहिए और खुद भी अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करके सुनना चाहिए। दूसरों से मिले फीडबैक का हमेशा स्वागत करना चाहिए। अपनी कहानी को लेकर स्क्रीनराइटर को लचीला होना चाहिए।
पैनल डिस्कशन में शामिल सभी प्रोड्यूसर-फाइनेंशर का कहना है कि पहले अपनी कहानी को यूनिक बनाइये, तब डायरेक्टर प्रोड्यूसर के पास उसे ईमेल से भेजिये या फिर खुद से मिलकर अपनी कहानी सुनाइये। इनका ये भी कहना है कि ट्रेंड या डायरेक्टर प्रोड्यूसर के पीछे मत भागिये।
आप पूरे डिसक्शन को जरूर देखिये-सुनिये और अपने सपने को पूरे कीजिए।
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शनिवार, 8 जून 2024
सेजल बिन सब सून (कहानी); Sejal Bin Sab Soon (Story)II SEJALRAJA II सेजलराजा II
सेजल बिन सब सून (कहानी); Sejal Bin Sab Soon (Story)II SEJALRAJA II सेजलराजा II
शाम के करीब साढ़े छह बज रहे हैं। गर्मी का दिन है। तपते सुरज की तपिश धीरे धीरे कम हो रही है, सूर्य भी अब अस्त हो रहा है, सुरज की लालिमा अब खत्म हो रही है। इन सबके बीच मुंबई से सटे नालासोपारा पश्चिम का सरकारी उद्यान वृंदावन गार्डेन में चहल-पहल है। बच्चे, बुढ़े, जवान, मर्द, महिलाएं सब के सब कुदरत का आनंद लेने में मशगूल हैं। कुछ दोस्तों संग बेंच पर बैठकर गपशप कर रहे हैं, कुछ वॉक कर रहे हैं. कुछ वीडियो बना रहे हैं, कुछ व्यायाम कर रहे हैं, कुछ डांस प्रैक्टिस कर रहे हैं, कुछ परिवार के साथ बैठकर नाश्ता कर रहे हैं, कुछ अलग अलग खेल खेल रहे हैं। कह सकते हैं कि पूरी फिजा में रोमानियत है।
गार्डेन के सारे पीपल, आम, नीम, नारियल, अमरूद, आम, सारे फूलों के पेड़ हवा संग मस्तियां कर रहे हैं, पत्ते भी मदमस्त होकर झूम रहे हैं, रंग-बिरंगे फूलों का भी क्या कहना, वो सब भी अपने मनमोहक डांस से सबको रोमांचित होने का चांस दे रहे हैं।
भले ही वृंदावन गार्डेन के पीपल, आम, नीम, नारियल, अमरूद, आम, सारे फूलों के पेड़ हवा संग मस्तियां कर रहे हैं, लेकिन उनमें एक उदासी छाई हुई सी लग रही है।
पत्ते भी मदमस्त होकर झूम रहे हैं, लेकिन उनमें किसी तरह का उत्साह नहीं दिख रहा है।
रंग-बिरंगे फूल भले ही अपने मनमोहक डांस से सबको रोमांचित होने का चांस दे रहे हैं, लेकिन उनमें वो जोश नहीं दिख रहा है, जो हमेशा से दिखता है।
मैंने हवा संग मस्तियां कर रहे पेड़ों से पूछा- तुमलोग मस्तियां तो कर रहे हो, लेकिन तुम लोगों में उदासी क्यों छाई है?
फिर, मैंने मदमस्त होकर झूम रहे पत्तों से पूछा- तुम लोगों में किसी तरह का उत्साह क्यों नहीं दिख रहा है?
मैंने मनमोहक डांस कर रहे फूलों से भी पूछा- तुम लोगों में आज वो जोश नहीं दिख रहा है, जो हमेशा से दिखाई देता है।
मुझसे पेड़ों ने, पत्तों ने, फूलों ने एक स्वर में कहा- अरे, यार पिछले तीन हफ्ते से गार्डेन में हंसती-मुस्कराती इतराती खूबसूरत सबकी चहेती सेजल नहीं आ रही है। मैंने उनके जवाब पर चौंकते हुए पूछा- ये सेजल कौन है ? हर दिन सुबह- शाम गार्डेन में इतने सारे लोग आते हैं, फिर केवल सेजल के नहीं आने से तुम लोगों में इतमी मायूसी क्यों है?
तब पेड़ों,पत्तों, फूलों ने मुझसे कहा- तुम्हें नहीं पता है क्या। सिर्फ हम लोग ही नहीं, गार्डेन में शाम को आने वाले सारे लोग सेजल के तीन हफ्ते से नहीं आने से मायूस हैं, उदास हैं, बेचैन हैं। मैंने उनकी बातों पर हैरान होते हुए कहा- मतलब, वृ़दावन गार्डन में 'सेजल बिन सब सून' ऐसा है क्या? सबने एक स्वर में मुझसे कहा- बिल्कुल, तुम सही समझे।
मैंने कहा, तुम सब को कैसे पता, कि गार्डेन में आने वाले सारे लोग सेजल के नहीं आने से मायूस हैं? तब सबने कहा, वो सामने वाला दो बेंच देख रहे हो। गार्डन में टहलने वाले गोल रास्ते में लोगों के बैठने के लिए कई बेंच रखे हुए हैं, उन्हीं में से उन सब ने दो बेंच की तरफ इशारा किया।
मैंने कहा- यहां तो बहुत सारे बेंच रखे हुए हैं, लेकिन तुम सब केवल दो बेंच की ही बात क्यों कर रहे हो? मेरे इस सवाल पर गार्डन के पेड़, पत्ते और फूलों ने जो कहा, उससे मैं क्या, कोई भी चौंक जाएगा। मैंने कहा, ऐसा क्या है आखिर।
तब सबने मुझसे कहा। उन दोनों बेंच पर शाम को गार्डन के खुलने से लेकर गार्डन के बंद होने तक यानी शाम के 4 बजे से लेकर 8 बजे तक 75-80 साल के 7-8 बुजुर्ग बैठते हैं। और सबको हर दिन 30-35 साल की शादी-शुदा सेजल का इंतजार रहता है। उन सब ने ही मुझसे कहा कि, सेजल जब भी गार्डन आती है शाम साढ़े 6 बजे के करीब आती है।
कुछ देर घूमती है और कुछ देर बेंच पर बैठ कर खुले आसमान तले आजादी का आनंद उठाती है और फिर अपने घर चली जाती है। हमेशा अकेली रहती है। ज्यादातर समय अपने मोबाइल पर लगी रहती है। केवल एक महिला के साथ अक्सर दिखाई देती है सेजल ।
मैंने पूछा, कि गार्डन में बहुत सारे लोग आते हैं, लेकिन तुम सब को कैसे पता कि जो 75-80 साल के 7-8 बुजुर्ग हैं, उनको सेजल का ही इंतजार रहता है। तब सबने कहा-सेजल के आने तक उन सभी का ध्यान अपनी अपनी घड़ियों और गार्डन के गेट पर रहता है। जैसे ही सेजल गार्डन में प्रवेश करती है और उन बुजुर्गों की निगाहों से गुजरती है, तो उनमें एक अजीब सी हलचल होने लगती है। सभी बुजुर्ग आंखों ही आंखों में सेजल के आने की खुशी जाहिर करते हैं और सेजल के विपरीत दिशा से घूमना शुरू कर देते हैं। मैंने चौंकते हुए कहा-अच्छा, ये बात है।
सेजल पर गलत निगाह रखने वाले उन बुजुर्गों के बारे में पेड़, पत्तों, फूलों ने एक बात और जो मुझसे कहा, उससे मेरे पैरों तली जमीन घिसक गई। एक पेड़ ने कहा- जब एक दिन सेजल काफी देरी से गार्डन में आई तो सारे बुजुर्ग काफी बैचेन थे।
जब सेजल ने घूमना शुरू किया, तो उन 7-8 बुजुर्गों में से दो बुजुर्गों ने भी सेजल के विपरीत दिशा से घूमना शुरू किया और जब वो दोनों सेजल के बगल से गुजर रहे थे, तो उनमें से एक ने दूसरे बुजुर्ग से कहा कि-ये महिला काफी इंतजार करवाती है! मैंने चौंकते हुए कहा, कि ओहो, ऐसी बात है।
मैंने उन सबसे कहा, कि ये तो बहुत गंभीर बात है। सेजल के बाप-दादा की उम्र के बुजुर्गों की इतनी गंदी निगाह, उन बुजुर्गों को तो शर्म आनी चाहिए, अपनी ऐसी घटिया नीयत पर।
फिर, मैंने पेड़ों, पत्तों, फूलों से कहा कि ये तो रही 7-8 घटिया बुजुर्गों की बात, जो सेजल पर गलत नीयत रखते हैं। ऐसे लोगों को तो सार्वजनिक जगहों पर एंट्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए। अपने बुढ़ापे के गलत फायदा उठाने वालों को बहिष्कार करना चाहिए। तो, अब बताओ तुम सब और कैसे कह सकते हो कि इस गार्डन में सेजल बिन सब सून रहता है।
तब उन सब ने कहा कि हम सबने गार्डन आने वाली की महिलाओं को सेजल की खूबसूरती, उसके चलने, बात करने, मुस्कराने की अदाओं पर जलते देखा है। यही नहीं, गार्डन में आने वाले बहुत सारे बच्चे भी सेजल के आकर्षण में डूबे दिखाई देते हैं।
मैंने मन ही मन सोचा- सेजल को लेकर गार्डन में जब इतनी दीवानगी है, तो सचमुच हम कह सकते हैं कि- सेजल बिन सब सून।
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शुक्रवार, 7 जून 2024
Kahani Time: Kshitij Ke Paar by ChandraKanta Dangi
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